Book 2 • Chapter 25
Section 25
8 verses
Verse 1
कोपभवन सुनि सकुचेउ राउ भय बस अगहुड़ परइ न पाऊ
Verse 2
सुरपति बसइ बाहँबल जाके नरपति सकल रहहिं रुख ताकें
Verse 3
सो सुनि तिय रिस गयउ सुखाई देखहु काम प्रताप बड़ाई
Verse 4
सूल कुलिस असि अँगवनिहारे ते रतिनाथ सुमन सर मारे
Verse 5
सभय नरेसु प्रिया पहिं गयऊ देखि दसा दुखु दारुन भयऊ
Verse 6
भूमि सयन पटु मोट पुराना दिए डारि तन भूषण नाना
Verse 7
कुमतिहि कसि कुबेषता फाबी अन अहिवातु सूच जनु भाबी
Verse 8
जाइ निकट नृपु कह मृदु बानी प्रानप्रिया केहि हेतु रिसानी
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