Book 2 • Chapter 26
Section 26
10 verses
Verse 1
अनहित तोर प्रिया केइँ कीन्हा केहि दुइ सिर केहि जमु चह लीन्हा
Verse 2
कहु केहि रंकहि करौ नरेसू कहु केहि नृपहि निकासौं देसू
Verse 3
सकउँ तोर अरि अमरउ मारी काह कीट बपुरे नर नारी
Verse 4
जानसि मोर सुभाउ बरोरू मनु तव आनन चंद चकोरू
Verse 5
प्रिया प्रान सुत सरबसु मोरें परिजन प्रजा सकल बस तोरें
Verse 6
जौं कछु कहौ कपटु करि तोही भामिनि राम सपथ सत मोही
Verse 7
बिहसि मागु मनभावति बाता भूषन सजहि मनोहर गाता
Verse 8
घरी कुघरी समुझि जियँ देखू बेगि प्रिया परिहरहि कुबेषू
Verse 9
यह सुनि मन गुनि सपथ बड़ि बिहसि उठी मतिमंद
Verse 10
भूषन सजति बिलोकि मृगु मनहुँ किरातिनि फंद
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