Book 2 • Chapter 27
Section 27
10 verses
Verse 1
पुनि कह राउ सुह्रद जियँ जानी प्रेम पुलकि मृदु मंजुल बानी
Verse 2
भामिनि भयउ तोर मनभावा घर घर नगर अनंद बधावा
Verse 3
रामहि देउँ कालि जुबराजू सजहि सुलोचनि मंगल साजू
Verse 4
दलकि उठेउ सुनि ह्रदउ कठोरू जनु छुइ गयउ पाक बरतोरू
Verse 5
ऐसिउ पीर बिहसि तेहि गोई चोर नारि जिमि प्रगटि न रोई
Verse 6
लखहिं न भूप कपट चतुराई कोटि कुटिल मनि गुरू पढ़ाई
Verse 7
जद्यपि नीति निपुन नरनाहू नारिचरित जलनिधि अवगाहू
Verse 8
कपट सनेहु बढ़ाइ बहोरी बोली बिहसि नयन मुहु मोरी
Verse 9
मागु मागु पै कहहु पिय कबहुँ न देहु न लेहु
Verse 10
देन कहेहु बरदान दुइ तेउ पावत संदेहु
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