Book 2 • Chapter 28
Section 28
10 verses
Verse 1
जानेउँ मरमु राउ हँसि कहई तुम्हहि कोहाब परम प्रिय अहई
Verse 2
थाति राखि न मागिहु काऊ बिसरि गयउ मोहि भोर सुभाऊ
Verse 3
झूठेहुँ हमहि दोषु जनि देहू दुइ कै चारि मागि मकु लेहू
Verse 4
रघुकुल रीति सदा चलि आई प्रान जाहुँ बरु बचनु न जाई
Verse 5
नहिं असत्य सम पातक पुंजा गिरि सम होहिं कि कोटिक गुंजा
Verse 6
सत्यमूल सब सुकृत सुहाए बेद पुरान बिदित मनु गाए
Verse 7
तेहि पर राम सपथ करि आई सुकृत सनेह अवधि रघुराई
Verse 8
बात दृढ़ाइ कुमति हँसि बोली कुमत कुबिहग कुलह जनु खोली
Verse 9
भूप मनोरथ सुभग बनु सुख सुबिहंग समाजु
Verse 10
भिल्लनि जिमि छाड़न चहति बचनु भयंकरु बाजु
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