Book 2 • Chapter 241
Section 241
10 verses
Verse 1
मिलनि प्रीति किमि जाइ बखानी कबिकुल अगम करम मन बानी
Verse 2
परम पेम पूरन दोउ भाई मन बुधि चित अहमिति बिसराई
Verse 3
कहहु सुपेम प्रगट को करई केहि छाया कबि मति अनुसरई
Verse 4
कबिहि अरथ आखर बलु साँचा अनुहरि ताल गतिहि नटु नाचा
Verse 5
अगम सनेह भरत रघुबर को जहँ न जाइ मनु बिधि हरि हर को
Verse 6
सो मैं कुमति कहौं केहि भाँती बाज सुराग कि गाँडर ताँती
Verse 7
मिलनि बिलोकि भरत रघुबर की सुरगन सभय धकधकी धरकी
Verse 8
समुझाए सुरगुरु जड़ जागे बरषि प्रसून प्रसंसन लागे
Verse 9
मिलि सपेम रिपुसूदनहि केवटु भेंटेउ राम
Verse 10
भूरि भायँ भेंटे भरत लछिमन करत प्रनाम
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