Book 2 • Chapter 242
Section 242
10 verses
Verse 1
भेंटेउ लखन ललकि लघु भाई बहुरि निषादु लीन्ह उर लाई
Verse 2
पुनि मुनिगन दुहुँ भाइन्ह बंदे अभिमत आसिष पाइ अनंदे
Verse 3
सानुज भरत उमगि अनुरागा धरि सिर सिय पद पदुम परागा
Verse 4
पुनि पुनि करत प्रनाम उठाए सिर कर कमल परसि बैठाए
Verse 5
सीयँ असीस दीन्हि मन माहीं मगन सनेहँ देह सुधि नाहीं
Verse 6
सब बिधि सानुकूल लखि सीता भे निसोच उर अपडर बीता
Verse 7
कोउ किछु कहइ न कोउ किछु पूँछा प्रेम भरा मन निज गति छूँछा
Verse 8
तेहि अवसर केवटु धीरजु धरि जोरि पानि बिनवत प्रनामु करि
Verse 9
नाथ साथ मुनिनाथ के मातु सकल पुर लोग
Verse 10
सेवक सेनप सचिव सब आए बिकल बियोग
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