Book 2 • Chapter 271
Section 271
10 verses
Verse 1
कोसलपति गति सुनि जनकौरा भे सब लोक सोक बस बौरा
Verse 2
जेहिं देखे तेहि समय बिदेहू नामु सत्य अस लाग न केहू
Verse 3
रानि कुचालि सुनत नरपालहि सूझ न कछु जस मनि बिनु ब्यालहि
Verse 4
भरत राज रघुबर बनबासू भा मिथिलेसहि हृदयँ हराँसू
Verse 5
नृप बूझे बुध सचिव समाजू कहहु बिचारि उचित का आजू
Verse 6
समुझि अवध असमंजस दोऊ चलिअ कि रहिअ न कह कछु कोऊ
Verse 7
नृपहि धीर धरि हृदयँ बिचारी पठए अवध चतुर चर चारी
Verse 8
बूझि भरत सति भाउ कुभाऊ आएहु बेगि न होइ लखाऊ
Verse 9
गए अवध चर भरत गति बूझि देखि करतूति
Verse 10
चले चित्रकूटहि भरतु चार चले तेरहूति
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