Book 2 • Chapter 274
Section 274
10 verses
Verse 1
सुनि सनेहमय पुरजन बानी निंदहिं जोग बिरति मुनि ग्यानी
Verse 2
एहि बिधि नित्यकरम करि पुरजन रामहि करहिं प्रनाम पुलकि तन
Verse 3
ऊँच नीच मध्यम नर नारी लहहिं दरसु निज निज अनुहारी
Verse 4
सावधान सबही सनमानहिं सकल सराहत कृपानिधानहिं
Verse 5
लरिकाइहि ते रघुबर बानी पालत नीति प्रीति पहिचानी
Verse 6
सील सकोच सिंधु रघुराऊ सुमुख सुलोचन सरल सुभाऊ
Verse 7
कहत राम गुन गन अनुरागे सब निज भाग सराहन लागे
Verse 8
हम सम पुन्य पुंज जग थोरे जिन्हहि रामु जानत करि मोरे
Verse 9
प्रेम मगन तेहि समय सब सुनि आवत मिथिलेसु
Verse 10
सहित सभा संभ्रम उठेउ रबिकुल कमल दिनेसु
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