Book 2 • Chapter 286
Section 286
10 verses
Verse 1
प्रिय परिजनहि मिली बैदेही जो जेहि जोगु भाँति तेहि तेही
Verse 2
तापस बेष जानकी देखी भा सबु बिकल बिषाद बिसेषी
Verse 3
जनक राम गुर आयसु पाई चले थलहि सिय देखी आई
Verse 4
लीन्हि लाइ उर जनक जानकी पाहुन पावन पेम प्रान की
Verse 5
उर उमगेउ अंबुधि अनुरागू भयउ भूप मनु मनहुँ पयागू
Verse 6
सिय सनेह बटु बाढ़त जोहा ता पर राम पेम सिसु सोहा
Verse 7
चिरजीवी मुनि ग्यान बिकल जनु बूड़त लहेउ बाल अवलंबनु
Verse 8
मोह मगन मति नहिं बिदेह की महिमा सिय रघुबर सनेह की
Verse 9
सिय पितु मातु सनेह बस बिकल न सकी सँभारि
Verse 10
धरनिसुताँ धीरजु धरेउ समउ सुधरमु बिचारि
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