Book 2 • Chapter 294
Section 294
10 verses
Verse 1
भरत बचन सुनि देखि सुभाऊ सहित समाज सराहत राऊ
Verse 2
सुगम अगम मृदु मंजु कठोरे अरथु अमित अति आखर थोरे
Verse 3
ज्यौ मुख मुकुर मुकुरु निज पानी गहि न जाइ अस अदभुत बानी
Verse 4
भूप भरत मुनि सहित समाजू गे जहँ बिबुध कुमुद द्विजराजू
Verse 5
सुनि सुधि सोच बिकल सब लोगा मनहुँ मीनगन नव जल जोगा
Verse 6
देवँ प्रथम कुलगुर गति देखी निरखि बिदेह सनेह बिसेषी
Verse 7
राम भगतिमय भरतु निहारे सुर स्वारथी हहरि हियँ हारे
Verse 8
सब कोउ राम पेममय पेखा भउ अलेख सोच बस लेखा
Verse 9
रामु सनेह सकोच बस कह ससोच सुरराज
Verse 10
रचहु प्रपंचहि पंच मिलि नाहिं त भयउ अकाजु
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