Book 2 • Chapter 297
Section 297
10 verses
Verse 1
सभा सकुच बस भरत निहारी रामबंधु धरि धीरजु भारी
Verse 2
कुसमउ देखि सनेहु सँभारा बढ़त बिंधि जिमि घटज निवारा
Verse 3
सोक कनकलोचन मति छोनी हरी बिमल गुन गन जगजोनी
Verse 4
भरत बिबेक बराहँ बिसाला अनायास उधरी तेहि काला
Verse 5
करि प्रनामु सब कहँ कर जोरे रामु राउ गुर साधु निहोरे
Verse 6
छमब आजु अति अनुचित मोरा कहउँ बदन मृदु बचन कठोरा
Verse 7
हियँ सुमिरी सारदा सुहाई मानस तें मुख पंकज आई
Verse 8
बिमल बिबेक धरम नय साली भरत भारती मंजु मराली
Verse 9
निरखि बिबेक बिलोचनन्हि सिथिल सनेहँ समाजु
Verse 10
करि प्रनामु बोले भरतु सुमिरि सीय रघुराजु
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