Book 2 • Chapter 298
Section 298
10 verses
Verse 1
प्रभु पितु मातु सुह्रद गुर स्वामी पूज्य परम हित अतंरजामी
Verse 2
सरल सुसाहिबु सील निधानू प्रनतपाल सर्बग्य सुजानू
Verse 3
समरथ सरनागत हितकारी गुनगाहकु अवगुन अघ हारी
Verse 4
स्वामि गोसाँइहि सरिस गोसाई मोहि समान मैं साइँ दोहाई
Verse 5
प्रभु पितु बचन मोह बस पेली आयउँ इहाँ समाजु सकेली
Verse 6
जग भल पोच ऊँच अरु नीचू अमिअ अमरपद माहुरु मीचू
Verse 7
राम रजाइ मेट मन माहीं देखा सुना कतहुँ कोउ नाहीं
Verse 8
सो मैं सब बिधि कीन्हि ढिठाई प्रभु मानी सनेह सेवकाई
Verse 9
कृपाँ भलाई आपनी नाथ कीन्ह भल मोर
Verse 10
दूषन भे भूषन सरिस सुजसु चारु चहु ओर
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