Book 2 • Chapter 322
Section 322
10 verses
Verse 1
मुनि महिसुर गुर भरत भुआलू राम बिरहँ सबु साजु बिहालू
Verse 2
प्रभु गुन ग्राम गनत मन माहीं सब चुपचाप चले मग जाहीं
Verse 3
जमुना उतरि पार सबु भयऊ सो बासरु बिनु भोजन गयऊ
Verse 4
उतरि देवसरि दूसर बासू रामसखाँ सब कीन्ह सुपासू
Verse 5
सई उतरि गोमतीं नहाए चौथें दिवस अवधपुर आए
Verse 6
जनकु रहे पुर बासर चारी राज काज सब साज सँभारी
Verse 7
सौंपि सचिव गुर भरतहि राजू तेरहुति चले साजि सबु साजू
Verse 8
नगर नारि नर गुर सिख मानी बसे सुखेन राम रजधानी
Verse 9
राम दरस लगि लोग सब करत नेम उपबास
Verse 10
तजि तजि भूषन भोग सुख जिअत अवधि कीं आस
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