Book 2 • Chapter 323
Section 323
10 verses
Verse 1
सचिव सुसेवक भरत प्रबोधे निज निज काज पाइ पाइ सिख ओधे
Verse 2
पुनि सिख दीन्ह बोलि लघु भाई सौंपी सकल मातु सेवकाई
Verse 3
भूसुर बोलि भरत कर जोरे करि प्रनाम बय बिनय निहोरे
Verse 4
ऊँच नीच कारजु भल पोचू आयसु देब न करब सँकोचू
Verse 5
परिजन पुरजन प्रजा बोलाए समाधानु करि सुबस बसाए
Verse 6
सानुज गे गुर गेहँ बहोरी करि दंडवत कहत कर जोरी
Verse 7
आयसु होइ त रहौं सनेमा बोले मुनि तन पुलकि सपेमा
Verse 8
समुझव कहब करब तुम्ह जोई धरम सारु जग होइहि सोई
Verse 9
सुनि सिख पाइ असीस बड़ि गनक बोलि दिनु साधि
Verse 10
सिंघासन प्रभु पादुका बैठारे निरुपाधि
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