Book 2 • Chapter 35
Section 35
10 verses
Verse 1
ब्याकुल राउ सिथिल सब गाता करिनि कलपतरु मनहुँ निपाता
Verse 2
कंठु सूख मुख आव न बानी जनु पाठीनु दीन बिनु पानी
Verse 3
पुनि कह कटु कठोर कैकेई मनहुँ घाय महुँ माहुर देई
Verse 4
जौं अंतहुँ अस करतबु रहेऊ मागु मागु तुम्ह केहिं बल कहेऊ
Verse 5
दुइ कि होइ एक समय भुआला हँसब ठठाइ फुलाउब गाला
Verse 6
दानि कहाउब अरु कृपनाई होइ कि खेम कुसल रौताई
Verse 7
छाड़हु बचनु कि धीरजु धरहू जनि अबला जिमि करुना करहू
Verse 8
तनु तिय तनय धामु धनु धरनी सत्यसंध कहुँ तृन सम बरनी
Verse 9
मरम बचन सुनि राउ कह कहु कछु दोषु न तोर
Verse 10
लागेउ तोहि पिसाच जिमि कालु कहावत मोर
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