Book 2 • Chapter 36
Section 36
10 verses
Verse 1
चहत न भरत भूपतहि भोरें बिधि बस कुमति बसी जिय तोरें
Verse 2
सो सबु मोर पाप परिनामू भयउ कुठाहर जेहिं बिधि बामू
Verse 3
सुबस बसिहि फिरि अवध सुहाई सब गुन धाम राम प्रभुताई
Verse 4
करिहहिं भाइ सकल सेवकाई होइहि तिहुँ पुर राम बड़ाई
Verse 5
तोर कलंकु मोर पछिताऊ मुएहुँ न मिटहि न जाइहि काऊ
Verse 6
अब तोहि नीक लाग करु सोई लोचन ओट बैठु मुहु गोई
Verse 7
जब लगि जिऔं कहउँ कर जोरी तब लगि जनि कछु कहसि बहोरी
Verse 8
फिरि पछितैहसि अंत अभागी मारसि गाइ नहारु लागी
Verse 9
परेउ राउ कहि कोटि बिधि काहे करसि निदानु
Verse 10
कपट सयानि न कहति कछु जागति मनहुँ मसानु
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