Book 2 • Chapter 38
Section 38
10 verses
Verse 1
पछिले पहर भूपु नित जागा आजु हमहि बड़ अचरजु लागा
Verse 2
जाहु सुमंत्र जगावहु जाई कीजिअ काजु रजायसु पाई
Verse 3
गए सुमंत्रु तब राउर माही देखि भयावन जात डेराहीं
Verse 4
धाइ खाइ जनु जाइ न हेरा मानहुँ बिपति बिषाद बसेरा
Verse 5
पूछें कोउ न ऊतरु देई गए जेंहिं भवन भूप कैकैई
Verse 6
कहि जयजीव बैठ सिरु नाई दैखि भूप गति गयउ सुखाई
Verse 7
सोच बिकल बिबरन महि परेऊ मानहुँ कमल मूलु परिहरेऊ
Verse 8
सचिउ सभीत सकइ नहिं पूँछी बोली असुभ भरी सुभ छूछी
Verse 9
परी न राजहि नीद निसि हेतु जान जगदीसु
Verse 10
रामु रामु रटि भोरु किय कहइ न मरमु महीसु
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