Book 2 • Chapter 39
Section 39
10 verses
Verse 1
आनहु रामहि बेगि बोलाई समाचार तब पूँछेहु आई
Verse 2
चलेउ सुमंत्र राय रूख जानी लखी कुचालि कीन्हि कछु रानी
Verse 3
सोच बिकल मग परइ न पाऊ रामहि बोलि कहिहि का राऊ
Verse 4
उर धरि धीरजु गयउ दुआरें पूछँहिं सकल देखि मनु मारें
Verse 5
समाधानु करि सो सबही का गयउ जहाँ दिनकर कुल टीका
Verse 6
रामु सुमंत्रहि आवत देखा आदरु कीन्ह पिता सम लेखा
Verse 7
निरखि बदनु कहि भूप रजाई रघुकुलदीपहि चलेउ लेवाई
Verse 8
रामु कुभाँति सचिव सँग जाहीं देखि लोग जहँ तहँ बिलखाहीं
Verse 9
जाइ दीख रघुबंसमनि नरपति निपट कुसाजु
Verse 10
सहमि परेउ लखि सिंघिनिहि मनहुँ बृद्ध गजराजु
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