Book 2 • Chapter 49
Section 49
10 verses
Verse 1
एक बिधातहिं दूषनु देंहीं सुधा देखाइ दीन्ह बिषु जेहीं
Verse 2
खरभरु नगर सोचु सब काहू दुसह दाहु उर मिटा उछाहू
Verse 3
बिप्रबधू कुलमान्य जठेरी जे प्रिय परम कैकेई केरी
Verse 4
लगीं देन सिख सीलु सराही बचन बानसम लागहिं ताही
Verse 5
भरतु न मोहि प्रिय राम समाना सदा कहहु यहु सबु जगु जाना
Verse 6
करहु राम पर सहज सनेहू केहिं अपराध आजु बनु देहू
Verse 7
कबहुँ न कियहु सवति आरेसू प्रीति प्रतीति जान सबु देसू
Verse 8
कौसल्याँ अब काह बिगारा तुम्ह जेहि लागि बज्र पुर पारा
Verse 9
सीय कि पिय सँगु परिहरिहि लखनु कि रहिहहिं धाम
Verse 10
राजु कि भूँजब भरत पुर नृपु कि जिइहि बिनु राम
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