Book 2 • Chapter 50
Section 50
8 verses
Verse 1
अस बिचारि उर छाड़हु कोहू सोक कलंक कोठि जनि होहू
Verse 2
भरतहि अवसि देहु जुबराजू कानन काह राम कर काजू
Verse 3
नाहिन रामु राज के भूखे धरम धुरीन बिषय रस रूखे
Verse 4
गुर गृह बसहुँ रामु तजि गेहू नृप सन अस बरु दूसर लेहू
Verse 5
जौं नहिं लगिहहु कहें हमारे नहिं लागिहि कछु हाथ तुम्हारे
Verse 6
जौं परिहास कीन्हि कछु होई तौ कहि प्रगट जनावहु सोई
Verse 7
राम सरिस सुत कानन जोगू काह कहिहि सुनि तुम्ह कहुँ लोगू
Verse 8
उठहु बेगि सोइ करहु उपाई जेहि बिधि सोकु कलंकु नसाई
0:000:00
Speed: