Book 2 • Chapter 59
Section 59
10 verses
Verse 1
मैं पुनि पुत्रबधू प्रिय पाई रूप रासि गुन सील सुहाई
Verse 2
नयन पुतरि करि प्रीति बढ़ाई राखेउँ प्रान जानिकिहिं लाई
Verse 3
कलपबेलि जिमि बहुबिधि लाली सींचि सनेह सलिल प्रतिपाली
Verse 4
फूलत फलत भयउ बिधि बामा जानि न जाइ काह परिनामा
Verse 5
पलँग पीठ तजि गोद हिंड़ोरा सियँ न दीन्ह पगु अवनि कठोरा
Verse 6
जिअनमूरि जिमि जोगवत रहऊँ दीप बाति नहिं टारन कहऊँ
Verse 7
सोइ सिय चलन चहति बन साथा आयसु काह होइ रघुनाथा
Verse 8
चंद किरन रस रसिक चकोरी रबि रुख नयन सकइ किमि जोरी
Verse 9
करि केहरि निसिचर चरहिं दुष्ट जंतु बन भूरि
Verse 10
बिष बाटिकाँ कि सोह सुत सुभग सजीवनि मूरि
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