Book 2 • Chapter 66
Section 66
10 verses
Verse 1
बनदेवीं बनदेव उदारा करिहहिं सासु ससुर सम सारा
Verse 2
कुस किसलय साथरी सुहाई प्रभु सँग मंजु मनोज तुराई
Verse 3
कंद मूल फल अमिअ अहारू अवध सौध सत सरिस पहारू
Verse 4
छिनु छिनु प्रभु पद कमल बिलोकि रहिहउँ मुदित दिवस जिमि कोकी
Verse 5
बन दुख नाथ कहे बहुतेरे भय बिषाद परिताप घनेरे
Verse 6
प्रभु बियोग लवलेस समाना सब मिलि होहिं न कृपानिधाना
Verse 7
अस जियँ जानि सुजान सिरोमनि लेइअ संग मोहि छाड़िअ जनि
Verse 8
बिनती बहुत करौं का स्वामी करुनामय उर अंतरजामी
Verse 9
राखिअ अवध जो अवधि लगि रहत न जनिअहिं प्रान
Verse 10
दीनबंधु संदर सुखद सील सनेह निधान
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