Book 2 • Chapter 67
Section 67
10 verses
Verse 1
मोहि मग चलत न होइहि हारी छिनु छिनु चरन सरोज निहारी
Verse 2
सबहि भाँति पिय सेवा करिहौं मारग जनित सकल श्रम हरिहौं
Verse 3
पाय पखारी बैठि तरु छाहीं करिहउँ बाउ मुदित मन माहीं
Verse 4
श्रम कन सहित स्याम तनु देखें कहँ दुख समउ प्रानपति पेखें
Verse 5
सम महि तृन तरुपल्लव डासी पाग पलोटिहि सब निसि दासी
Verse 6
बारबार मृदु मूरति जोही लागहि तात बयारि न मोही
Verse 7
को प्रभु सँग मोहि चितवनिहारा सिंघबधुहि जिमि ससक सिआरा
Verse 8
मैं सुकुमारि नाथ बन जोगू तुम्हहि उचित तप मो कहुँ भोगू
Verse 9
ऐसेउ बचन कठोर सुनि जौं न ह्रदउ बिलगान
Verse 10
तौ प्रभु बिषम बियोग दुख सहिहहिं पावँर प्रान
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