Book 2 • Chapter 68
Section 68
10 verses
Verse 1
अस कहि सीय बिकल भइ भारी बचन बियोगु न सकी सँभारी
Verse 2
देखि दसा रघुपति जियँ जाना हठि राखें नहिं राखिहि प्राना
Verse 3
कहेउ कृपाल भानुकुलनाथा परिहरि सोचु चलहु बन साथा
Verse 4
नहिं बिषाद कर अवसरु आजू बेगि करहु बन गवन समाजू
Verse 5
कहि प्रिय बचन प्रिया समुझाई लगे मातु पद आसिष पाई
Verse 6
बेगि प्रजा दुख मेटब आई जननी निठुर बिसरि जनि जाई
Verse 7
फिरहि दसा बिधि बहुरि कि मोरी देखिहउँ नयन मनोहर जोरी
Verse 8
सुदिन सुघरी तात कब होइहि जननी जिअत बदन बिधु जोइहि
Verse 9
बहुरि बच्छ कहि लालु कहि रघुपति रघुबर तात
Verse 10
कबहिं बोलाइ लगाइ हियँ हरषि निरखिहउँ गात
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