Book 2 • Chapter 76
Section 76
10 verses
Verse 1
गए लखनु जहँ जानकिनाथू भे मन मुदित पाइ प्रिय साथू
Verse 2
बंदि राम सिय चरन सुहाए चले संग नृपमंदिर आए
Verse 3
कहहिं परसपर पुर नर नारी भलि बनाइ बिधि बात बिगारी
Verse 4
तन कृस दुखु बदन मलीने बिकल मनहुँ माखी मधु छीने
Verse 5
कर मीजहिं सिरु धुनि पछिताहीं जनु बिन पंख बिहग अकुलाहीं
Verse 6
भइ बड़ि भीर भूप दरबारा बरनि न जाइ बिषादु अपारा
Verse 7
सचिवँ उठाइ राउ बैठारे कहि प्रिय बचन रामु पगु धारे
Verse 8
सिय समेत दोउ तनय निहारी ब्याकुल भयउ भूमिपति भारी
Verse 9
सीय सहित सुत सुभग दोउ देखि देखि अकुलाइ
Verse 10
बारहिं बार सनेह बस राउ लेइ उर लाइ
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