Book 2 • Chapter 82
Section 82
10 verses
Verse 1
जौ नहिं फिरहिं धीर दोउ भाई सत्यसंध दृढ़ब्रत रघुराई
Verse 2
तौ तुम्ह बिनय करेहु कर जोरी फेरिअ प्रभु मिथिलेसकिसोरी
Verse 3
जब सिय कानन देखि डेराई कहेहु मोरि सिख अवसरु पाई
Verse 4
सासु ससुर अस कहेउ सँदेसू पुत्रि फिरिअ बन बहुत कलेसू
Verse 5
पितृगृह कबहुँ कबहुँ ससुरारी रहेहु जहाँ रुचि होइ तुम्हारी
Verse 6
एहि बिधि करेहु उपाय कदंबा फिरइ त होइ प्रान अवलंबा
Verse 7
नाहिं त मोर मरनु परिनामा कछु न बसाइ भएँ बिधि बामा
Verse 8
अस कहि मुरुछि परा महि राऊ रामु लखनु सिय आनि देखाऊ
Verse 9
-पाइ रजायसु नाइ सिरु रथु अति बेग बनाइ
Verse 10
गयउ जहाँ बाहेर नगर सीय सहित दोउ भाइ
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