Book 2 • Chapter 86
Section 86
10 verses
Verse 1
जागे सकल लोग भएँ भोरू गे रघुनाथ भयउ अति सोरू
Verse 2
रथ कर खोज कतहहुँ नहिं पावहिं राम राम कहि चहु दिसि धावहिं
Verse 3
मनहुँ बारिनिधि बूड़ जहाजू भयउ बिकल बड़ बनिक समाजू
Verse 4
एकहि एक देंहिं उपदेसू तजे राम हम जानि कलेसू
Verse 5
निंदहिं आपु सराहहिं मीना धिग जीवनु रघुबीर बिहीना
Verse 6
जौं पै प्रिय बियोगु बिधि कीन्हा तौ कस मरनु न मागें दीन्हा
Verse 7
एहि बिधि करत प्रलाप कलापा आए अवध भरे परितापा
Verse 8
बिषम बियोगु न जाइ बखाना अवधि आस सब राखहिं प्राना
Verse 9
राम दरस हित नेम ब्रत लगे करन नर नारि
Verse 10
मनहुँ कोक कोकी कमल दीन बिहीन तमारि
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