Book 2 • Chapter 87
Section 87
10 verses
Verse 1
सीता सचिव सहित दोउ भाई सृंगबेरपुर पहुँचे जाई
Verse 2
उतरे राम देवसरि देखी कीन्ह दंडवत हरषु बिसेषी
Verse 3
लखन सचिवँ सियँ किए प्रनामा सबहि सहित सुखु पायउ रामा
Verse 4
गंग सकल मुद मंगल मूला सब सुख करनि हरनि सब सूला
Verse 5
कहि कहि कोटिक कथा प्रसंगा रामु बिलोकहिं गंग तरंगा
Verse 6
सचिवहि अनुजहि प्रियहि सुनाई बिबुध नदी महिमा अधिकाई
Verse 7
मज्जनु कीन्ह पंथ श्रम गयऊ सुचि जलु पिअत मुदित मन भयऊ
Verse 8
सुमिरत जाहि मिटइ श्रम भारू तेहि श्रम यह लौकिक ब्यवहारू
Verse 9
सुध्द सचिदानंदमय कंद भानुकुल केतु
Verse 10
चरित करत नर अनुहरत संसृति सागर सेतु
0:000:00
Speed: