Book 2 • Chapter 90
Section 90
10 verses
Verse 1
उठे लखनु प्रभु सोवत जानी कहि सचिवहि सोवन मृदु बानी
Verse 2
कछुक दूर सजि बान सरासन जागन लगे बैठि बीरासन
Verse 3
गुँह बोलाइ पाहरू प्रतीती ठावँ ठाँव राखे अति प्रीती
Verse 4
आपु लखन पहिं बैठेउ जाई कटि भाथी सर चाप चढ़ाई
Verse 5
सोवत प्रभुहि निहारि निषादू भयउ प्रेम बस ह्दयँ बिषादू
Verse 6
तनु पुलकित जलु लोचन बहई बचन सप्रेम लखन सन कहई
Verse 7
भूपति भवन सुभायँ सुहावा सुरपति सदनु न पटतर पावा
Verse 8
मनिमय रचित चारु चौबारे जनु रतिपति निज हाथ सँवारे
Verse 9
सुचि सुबिचित्र सुभोगमय सुमन सुगंध सुबास
Verse 10
पलँग मंजु मनिदीप जहँ सब बिधि सकल सुपास
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