Book 2 • Chapter 91
Section 91
10 verses
Verse 1
बिबिध बसन उपधान तुराई छीर फेन मृदु बिसद सुहाई
Verse 2
तहँ सिय रामु सयन निसि करहीं निज छबि रति मनोज मदु हरहीं
Verse 3
ते सिय रामु साथरीं सोए श्रमित बसन बिनु जाहिं न जोए
Verse 4
मातु पिता परिजन पुरबासी सखा सुसील दास अरु दासी
Verse 5
जोगवहिं जिन्हहि प्रान की नाई महि सोवत तेइ राम गोसाईं
Verse 6
पिता जनक जग बिदित प्रभाऊ ससुर सुरेस सखा रघुराऊ
Verse 7
रामचंदु पति सो बैदेही सोवत महि बिधि बाम न केही
Verse 8
सिय रघुबीर कि कानन जोगू करम प्रधान सत्य कह लोगू
Verse 9
कैकयनंदिनि मंदमति कठिन कुटिलपनु कीन्ह
Verse 10
जेहीं रघुनंदन जानकिहि सुख अवसर दुखु दीन्ह
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