Book 1 • Chapter 13
Section 13
12 verses
Verse 1
सब जानत प्रभु प्रभुता सोई तदपि कहें बिनु रहा न कोई
Verse 2
तहाँ बेद अस कारन राखा भजन प्रभाउ भाँति बहु भाषा
Verse 3
एक अनीह अरूप अनामा अज सच्चिदानंद पर धामा
Verse 4
ब्यापक बिस्वरूप भगवाना तेहिं धरि देह चरित कृत नाना
Verse 5
सो केवल भगतन हित लागी परम कृपाल प्रनत अनुरागी
Verse 6
जेहि जन पर ममता अति छोहू जेहिं करुना करि कीन्ह न कोहू
Verse 7
गई बहोर गरीब नेवाजू सरल सबल साहिब रघुराजू
Verse 8
बुध बरनहिं हरि जस अस जानी करहि पुनीत सुफल निज बानी
Verse 9
तेहिं बल मैं रघुपति गुन गाथा कहिहउँ नाइ राम पद माथा
Verse 10
मुनिन्ह प्रथम हरि कीरति गाई तेहिं मग चलत सुगम मोहि भाई
Verse 11
अति अपार जे सरित बर जौं नृप सेतु कराहिं
Verse 12
चढि पिपीलिकउ परम लघु बिनु श्रम पारहि जाहिं
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