Book 1 • Chapter 135
Section 135
10 verses
Verse 1
जेहि दिसि बैठे नारद फूली सो दिसि देहि न बिलोकी भूली
Verse 2
पुनि पुनि मुनि उकसहिं अकुलाहीं देखि दसा हर गन मुसकाहीं
Verse 3
धरि नृपतनु तहँ गयउ कृपाला कुअँरि हरषि मेलेउ जयमाला
Verse 4
दुलहिनि लै गे लच्छिनिवासा नृपसमाज सब भयउ निरासा
Verse 5
मुनि अति बिकल मोंहँ मति नाठी मनि गिरि गई छूटि जनु गाँठी
Verse 6
तब हर गन बोले मुसुकाई निज मुख मुकुर बिलोकहु जाई
Verse 7
अस कहि दोउ भागे भयँ भारी बदन दीख मुनि बारि निहारी
Verse 8
बेषु बिलोकि क्रोध अति बाढ़ा तिन्हहि सराप दीन्ह अति गाढ़ा
Verse 9
होहु निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी दोउ
Verse 10
हँसेहु हमहि सो लेहु फल बहुरि हँसेहु मुनि कोउ
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