Book 1 • Chapter 139
Section 139
10 verses
Verse 1
हर गन मुनिहि जात पथ देखी बिगतमोह मन हरष बिसेषी
Verse 2
अति सभीत नारद पहिं आए गहि पद आरत बचन सुनाए
Verse 3
हर गन हम न बिप्र मुनिराया बड़ अपराध कीन्ह फल पाया
Verse 4
श्राप अनुग्रह करहु कृपाला बोले नारद दीनदयाला
Verse 5
निसिचर जाइ होहु तुम्ह दोऊ बैभव बिपुल तेज बल होऊ
Verse 6
भुजबल बिस्व जितब तुम्ह जहिआ धरिहहिं बिष्नु मनुज तनु तहिआ
Verse 7
समर मरन हरि हाथ तुम्हारा होइहहु मुकुत न पुनि संसारा
Verse 8
चले जुगल मुनि पद सिर नाई भए निसाचर कालहि पाई
Verse 9
एक कलप एहि हेतु प्रभु लीन्ह मनुज अवतार
Verse 10
सुर रंजन सज्जन सुखद हरि भंजन भुबि भार
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