Book 1 • Chapter 142
Section 142
10 verses
Verse 1
स्वायंभू मनु अरु सतरूपा जिन्ह तें भै नरसृष्टि अनूपा
Verse 2
दंपति धरम आचरन नीका अजहुँ गाव श्रुति जिन्ह कै लीका
Verse 3
नृप उत्तानपाद सुत तासू ध्रुव हरि भगत भयउ सुत जासू
Verse 4
लघु सुत नाम प्रिय्रब्रत ताही बेद पुरान प्रसंसहि जाही
Verse 5
देवहूति पुनि तासु कुमारी जो मुनि कर्दम कै प्रिय नारी
Verse 6
आदिदेव प्रभु दीनदयाला जठर धरेउ जेहिं कपिल कृपाला
Verse 7
सांख्य सास्त्र जिन्ह प्रगट बखाना तत्व बिचार निपुन भगवाना
Verse 8
तेहिं मनु राज कीन्ह बहु काला प्रभु आयसु सब बिधि प्रतिपाला
Verse 9
होइ न बिषय बिराग भवन बसत भा चौथपन
Verse 10
हृदयँ बहुत दुख लाग जनम गयउ हरिभगति बिनु
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