Book 1 • Chapter 148
Section 148
10 verses
Verse 1
पद राजीव बरनि नहि जाहीं मुनि मन मधुप बसहिं जेन्ह माहीं
Verse 2
बाम भाग सोभति अनुकूला आदिसक्ति छबिनिधि जगमूला
Verse 3
जासु अंस उपजहिं गुनखानी अगनित लच्छि उमा ब्रह्मानी
Verse 4
भृकुटि बिलास जासु जग होई राम बाम दिसि सीता सोई
Verse 5
छबिसमुद्र हरि रूप बिलोकी एकटक रहे नयन पट रोकी
Verse 6
चितवहिं सादर रूप अनूपा तृप्ति न मानहिं मनु सतरूपा
Verse 7
हरष बिबस तन दसा भुलानी परे दंड इव गहि पद पानी
Verse 8
सिर परसे प्रभु निज कर कंजा तुरत उठाए करुनापुंजा
Verse 9
बोले कृपानिधान पुनि अति प्रसन्न मोहि जानि
Verse 10
मागहु बर जोइ भाव मन महादानि अनुमानि
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