Book 1 • Chapter 149
Section 149
10 verses
Verse 1
सुनि प्रभु बचन जोरि जुग पानी धरि धीरजु बोली मृदु बानी
Verse 2
नाथ देखि पद कमल तुम्हारे अब पूरे सब काम हमारे
Verse 3
एक लालसा बड़ि उर माही सुगम अगम कहि जात सो नाहीं
Verse 4
तुम्हहि देत अति सुगम गोसाईं अगम लाग मोहि निज कृपनाईं
Verse 5
जथा दरिद्र बिबुधतरु पाई बहु संपति मागत सकुचाई
Verse 6
तासु प्रभा जान नहिं सोई तथा हृदयँ मम संसय होई
Verse 7
सो तुम्ह जानहु अंतरजामी पुरवहु मोर मनोरथ स्वामी
Verse 8
सकुच बिहाइ मागु नृप मोहि मोरें नहिं अदेय कछु तोही
Verse 9
दानि सिरोमनि कृपानिधि नाथ कहउँ सतिभाउ
Verse 10
चाहउँ तुम्हहि समान सुत प्रभु सन कवन दुराउ
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