Book 1 • Chapter 154
Section 154
10 verses
Verse 1
नृप हितकारक सचिव सयाना नाम धरमरुचि सुक्र समाना
Verse 2
सचिव सयान बंधु बलबीरा आपु प्रतापपुंज रनधीरा
Verse 3
सेन संग चतुरंग अपारा अमित सुभट सब समर जुझारा
Verse 4
सेन बिलोकि राउ हरषाना अरु बाजे गहगहे निसाना
Verse 5
बिजय हेतु कटकई बनाई सुदिन साधि नृप चलेउ बजाई
Verse 6
जँह तहँ परीं अनेक लराईं जीते सकल भूप बरिआई
Verse 7
सप्त दीप भुजबल बस कीन्हे लै लै दंड छाड़ि नृप दीन्हें
Verse 8
सकल अवनि मंडल तेहि काला एक प्रतापभानु महिपाला
Verse 9
स्वबस बिस्व करि बाहुबल निज पुर कीन्ह प्रबेसु
Verse 10
अरथ धरम कामादि सुख सेवइ समयँ नरेसु
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