Book 1 • Chapter 157
Section 157
10 verses
Verse 1
आवत देखि अधिक रव बाजी चलेउ बराह मरुत गति भाजी
Verse 2
तुरत कीन्ह नृप सर संधाना महि मिलि गयउ बिलोकत बाना
Verse 3
तकि तकि तीर महीस चलावा करि छल सुअर सरीर बचावा
Verse 4
प्रगटत दुरत जाइ मृग भागा रिस बस भूप चलेउ संग लागा
Verse 5
गयउ दूरि घन गहन बराहू जहँ नाहिन गज बाजि निबाहू
Verse 6
अति अकेल बन बिपुल कलेसू तदपि न मृग मग तजइ नरेसू
Verse 7
कोल बिलोकि भूप बड़ धीरा भागि पैठ गिरिगुहाँ गभीरा
Verse 8
अगम देखि नृप अति पछिताई फिरेउ महाबन परेउ भुलाई
Verse 9
खेद खिन्न छुद्धित तृषित राजा बाजि समेत
Verse 10
खोजत ब्याकुल सरित सर जल बिनु भयउ अचेत
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