Book 1 • Chapter 176
Section 176
10 verses
Verse 1
काल पाइ मुनि सुनु सोइ राजा भयउ निसाचर सहित समाजा
Verse 2
दस सिर ताहि बीस भुजदंडा रावन नाम बीर बरिबंडा
Verse 3
भूप अनुज अरिमर्दन नामा भयउ सो कुंभकरन बलधामा
Verse 4
सचिव जो रहा धरमरुचि जासू भयउ बिमात्र बंधु लघु तासू
Verse 5
नाम बिभीषन जेहि जग जाना बिष्नुभगत बिग्यान निधाना
Verse 6
रहे जे सुत सेवक नृप केरे भए निसाचर घोर घनेरे
Verse 7
कामरूप खल जिनस अनेका कुटिल भयंकर बिगत बिबेका
Verse 8
कृपा रहित हिंसक सब पापी बरनि न जाहिं बिस्व परितापी
Verse 9
उपजे जदपि पुलस्त्यकुल पावन अमल अनूप
Verse 10
तदपि महीसुर श्राप बस भए सकल अघरूप
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