Book 1 • Chapter 186
Section 186
16 verses
Verse 1
जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता
Verse 2
गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिधुंसुता प्रिय कंता
Verse 3
पालन सुर धरनी अद्भुत करनी मरम न जानइ कोई
Verse 4
जो सहज कृपाला दीनदयाला करउ अनुग्रह सोई
Verse 5
जय जय अबिनासी सब घट बासी ब्यापक परमानंदा
Verse 6
अबिगत गोतीतं चरित पुनीतं मायारहित मुकुंदा
Verse 7
जेहि लागि बिरागी अति अनुरागी बिगतमोह मुनिबृंदा
Verse 8
निसि बासर ध्यावहिं गुन गन गावहिं जयति सच्चिदानंदा
Verse 9
जेहिं सृष्टि उपाई त्रिबिध बनाई संग सहाय न दूजा
Verse 10
सो करउ अघारी चिंत हमारी जानिअ भगति न पूजा
Verse 11
जो भव भय भंजन मुनि मन रंजन गंजन बिपति बरूथा
Verse 12
मन बच क्रम बानी छाड़ि सयानी सरन सकल सुर जूथा
Verse 13
सारद श्रुति सेषा रिषय असेषा जा कहुँ कोउ नहि जाना
Verse 14
जेहि दीन पिआरे बेद पुकारे द्रवउ सो श्रीभगवाना
Verse 15
भव बारिधि मंदर सब बिधि सुंदर गुनमंदिर सुखपुंजा
Verse 16
मुनि सिद्ध सकल सुर परम भयातुर नमत नाथ पद कंजा
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