Book 1 • Chapter 188
Section 188
10 verses
Verse 1
गए देव सब निज निज धामा भूमि सहित मन कहुँ बिश्रामा
Verse 2
जो कछु आयसु ब्रह्माँ दीन्हा हरषे देव बिलंब न कीन्हा
Verse 3
बनचर देह धरि छिति माहीं अतुलित बल प्रताप तिन्ह पाहीं
Verse 4
गिरि तरु नख आयुध सब बीरा हरि मारग चितवहिं मतिधीरा
Verse 5
गिरि कानन जहँ तहँ भरि पूरी रहे निज निज अनीक रचि रूरी
Verse 6
यह सब रुचिर चरित मैं भाषा अब सो सुनहु जो बीचहिं राखा
Verse 7
अवधपुरीं रघुकुलमनि राऊ बेद बिदित तेहि दसरथ नाऊँ
Verse 8
धरम धुरंधर गुननिधि ग्यानी हृदयँ भगति मति सारँगपानी
Verse 9
कौसल्यादि नारि प्रिय सब आचरन पुनीत
Verse 10
पति अनुकूल प्रेम दृढ़ हरि पद कमल बिनीत
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