Book 1 • Chapter 189
Section 189
10 verses
Verse 1
एक बार भूपति मन माहीं भै गलानि मोरें सुत नाहीं
Verse 2
गुर गृह गयउ तुरत महिपाला चरन लागि करि बिनय बिसाला
Verse 3
निज दुख सुख सब गुरहि सुनायउ कहि बसिष्ठ बहुबिधि समुझायउ
Verse 4
धरहु धीर होइहहिं सुत चारी त्रिभुवन बिदित भगत भय हारी
Verse 5
सृंगी रिषहि बसिष्ठ बोलावा पुत्रकाम सुभ जग्य करावा
Verse 6
भगति सहित मुनि आहुति दीन्हें प्रगटे अगिनि चरू कर लीन्हें
Verse 7
जो बसिष्ठ कछु हृदयँ बिचारा सकल काजु भा सिद्ध तुम्हारा
Verse 8
यह हबि बाँटि देहु नृप जाई जथा जोग जेहि भाग बनाई
Verse 9
तब अदृस्य भए पावक सकल सभहि समुझाइ
Verse 10
परमानंद मगन नृप हरष न हृदयँ समाइ
0:000:00
Speed: