Book 1 • Chapter 190
Section 190
10 verses
Verse 1
तबहिं रायँ प्रिय नारि बोलाईं कौसल्यादि तहाँ चलि आई
Verse 2
अर्ध भाग कौसल्याहि दीन्हा उभय भाग आधे कर कीन्हा
Verse 3
कैकेई कहँ नृप सो दयऊ रह्यो सो उभय भाग पुनि भयऊ
Verse 4
कौसल्या कैकेई हाथ धरि दीन्ह सुमित्रहि मन प्रसन्न करि
Verse 5
एहि बिधि गर्भसहित सब नारी भईं हृदयँ हरषित सुख भारी
Verse 6
जा दिन तें हरि गर्भहिं आए सकल लोक सुख संपति छाए
Verse 7
मंदिर महँ सब राजहिं रानी सोभा सील तेज की खानीं
Verse 8
सुख जुत कछुक काल चलि गयऊ जेहिं प्रभु प्रगट सो अवसर भयऊ
Verse 9
जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल
Verse 10
चर अरु अचर हर्षजुत राम जनम सुखमूल
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