Book 1 • Chapter 191
Section 191
10 verses
Verse 1
नौमी तिथि मधु मास पुनीता सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता
Verse 2
मध्यदिवस अति सीत न घामा पावन काल लोक बिश्रामा
Verse 3
सीतल मंद सुरभि बह बाऊ हरषित सुर संतन मन चाऊ
Verse 4
बन कुसुमित गिरिगन मनिआरा स्त्रवहिं सकल सरिताऽमृतधारा
Verse 5
सो अवसर बिरंचि जब जाना चले सकल सुर साजि बिमाना
Verse 6
गगन बिमल सकुल सुर जूथा गावहिं गुन गंधर्ब बरूथा
Verse 7
बरषहिं सुमन सुअंजलि साजी गहगहि गगन दुंदुभी बाजी
Verse 8
अस्तुति करहिं नाग मुनि देवा बहुबिधि लावहिं निज निज सेवा
Verse 9
सुर समूह बिनती करि पहुँचे निज निज धाम
Verse 10
जगनिवास प्रभु प्रगटे अखिल लोक बिश्राम
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