Book 1 • Chapter 203
Section 203
11 verses
Verse 1
बालचरित हरि बहुबिधि कीन्हा अति अनंद दासन्ह कहँ दीन्हा
Verse 2
कछुक काल बीतें सब भाई बड़े भए परिजन सुखदाई
Verse 3
चूड़ाकरन कीन्ह गुरु जाई बिप्रन्ह पुनि दछिना बहु पाई
Verse 4
परम मनोहर चरित अपारा करत फिरत चारिउ सुकुमारा
Verse 5
मन क्रम बचन अगोचर जोई दसरथ अजिर बिचर प्रभु सोई
Verse 6
भोजन करत बोल जब राजा नहिं आवत तजि बाल समाजा
Verse 7
कौसल्या जब बोलन जाई ठुमकु ठुमकु प्रभु चलहिं पराई
Verse 8
निगम नेति सिव अंत न पावा ताहि धरै जननी हठि धावा
Verse 9
धूरस धूरि भरें तनु आए भूपति बिहसि गोद बैठाए
Verse 10
भोजन करत चपल चित इत उत अवसरु पाइ
Verse 11
भाजि चले किलकत मुख दधि ओदन लपटाइ
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