Book 1 • Chapter 204
Section 204
10 verses
Verse 1
बालचरित अति सरल सुहाए सारद सेष संभु श्रुति गाए
Verse 2
जिन कर मन इन्ह सन नहिं राता ते जन बंचित किए बिधाता
Verse 3
भए कुमार जबहिं सब भ्राता दीन्ह जनेऊ गुरु पितु माता
Verse 4
गुरगृहँ गए पढ़न रघुराई अलप काल बिद्या सब आई
Verse 5
जाकी सहज स्वास श्रुति चारी सो हरि पढ़ यह कौतुक भारी
Verse 6
बिद्या बिनय निपुन गुन सीला खेलहिं खेल सकल नृपलीला
Verse 7
करतल बान धनुष अति सोहा देखत रूप चराचर मोहा
Verse 8
जिन्ह बीथिन्ह बिहरहिं सब भाई थकित होहिं सब लोग लुगाई
Verse 9
कोसलपुर बासी नर नारि बृद्ध अरु बाल
Verse 10
प्रानहु ते प्रिय लागत सब कहुँ राम कृपाल
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