Book 1 • Chapter 230
Section 230
10 verses
Verse 1
कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि कहत लखन सन रामु हृदयँ गुनि
Verse 2
मानहुँ मदन दुंदुभी दीन्ही मनसा बिस्व बिजय कहँ कीन्ही
Verse 3
अस कहि फिरि चितए तेहि ओरा सिय मुख ससि भए नयन चकोरा
Verse 4
भए बिलोचन चारु अचंचल मनहुँ सकुचि निमि तजे दिगंचल
Verse 5
देखि सीय सोभा सुखु पावा हृदयँ सराहत बचनु न आवा
Verse 6
जनु बिरंचि सब निज निपुनाई बिरचि बिस्व कहँ प्रगटि देखाई
Verse 7
सुंदरता कहुँ सुंदर करई छबिगृहँ दीपसिखा जनु बरई
Verse 8
सब उपमा कबि रहे जुठारी केहिं पटतरौं बिदेहकुमारी
Verse 9
सिय सोभा हियँ बरनि प्रभु आपनि दसा बिचारि
Verse 10
बोले सुचि मन अनुज सन बचन समय अनुहारि
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