Book 1 • Chapter 235
Section 235
10 verses
Verse 1
जानि कठिन सिवचाप बिसूरति चली राखि उर स्यामल मूरति
Verse 2
प्रभु जब जात जानकी जानी सुख सनेह सोभा गुन खानी
Verse 3
परम प्रेममय मृदु मसि कीन्ही चारु चित भीतीं लिख लीन्ही
Verse 4
गई भवानी भवन बहोरी बंदि चरन बोली कर जोरी
Verse 5
जय जय गिरिबरराज किसोरी जय महेस मुख चंद चकोरी
Verse 6
जय गज बदन षड़ानन माता जगत जननि दामिनि दुति गाता
Verse 7
नहिं तव आदि मध्य अवसाना अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना
Verse 8
भव भव बिभव पराभव कारिनि बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि
Verse 9
पतिदेवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव रेख
Verse 10
महिमा अमित न सकहिं कहि सहस सारदा सेष
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