Book 1 • Chapter 236
Section 236
8 verses
Verse 1
सेवत तोहि सुलभ फल चारी बरदायनी पुरारि पिआरी
Verse 2
देबि पूजि पद कमल तुम्हारे सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे
Verse 3
मोर मनोरथु जानहु नीकें बसहु सदा उर पुर सबही कें
Verse 4
कीन्हेउँ प्रगट न कारन तेहीं अस कहि चरन गहे बैदेहीं
Verse 5
बिनय प्रेम बस भई भवानी खसी माल मूरति मुसुकानी
Verse 6
सादर सियँ प्रसादु सिर धरेऊ बोली गौरि हरषु हियँ भरेऊ
Verse 7
सुनु सिय सत्य असीस हमारी पूजिहि मन कामना तुम्हारी
Verse 8
नारद बचन सदा सुचि साचा सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा
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