Book 1 • Chapter 244
Section 244
10 verses
Verse 1
कटि तूनीर पीत पट बाँधे कर सर धनुष बाम बर काँधे
Verse 2
पीत जग्य उपबीत सुहाए नख सिख मंजु महाछबि छाए
Verse 3
देखि लोग सब भए सुखारे एकटक लोचन चलत न तारे
Verse 4
हरषे जनकु देखि दोउ भाई मुनि पद कमल गहे तब जाई
Verse 5
करि बिनती निज कथा सुनाई रंग अवनि सब मुनिहि देखाई
Verse 6
जहँ जहँ जाहि कुअँर बर दोऊ तहँ तहँ चकित चितव सबु कोऊ
Verse 7
निज निज रुख रामहि सबु देखा कोउ न जान कछु मरमु बिसेषा
Verse 8
भलि रचना मुनि नृप सन कहेऊ राजाँ मुदित महासुख लहेऊ
Verse 9
सब मंचन्ह ते मंचु एक सुंदर बिसद बिसाल
Verse 10
मुनि समेत दोउ बंधु तहँ बैठारे महिपाल
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